Saturday, 8 December 2018

सबसे आसान भाषा में समझिये आखिर है आरक्षण

सबसे आसान भाषा में समझिये आखिर है आरक्षण

Reservation
आरक्षण क्या है 

जय भीम साथियों
आरक्षण विषय पर बहुजन आवाज सागर पर पहले भी लिखें लिखे हैं यह लेख बहुजन समाज के लोगों की डिमांड पर सरल भाषा में समझाने के लिए यह लेख देखा है पहले के लोगों को पढ़ने के लिए आर्टिकल के नीचे लिंक पर जाकर वह लेख पढ़ सकते हैं ।

आरक्षण एक ऐसा देश है जिस पर सैकड़ों वीडियो लेख बनाए जा सकते हैं मैंने इस वीडियो तथा लेख में आरक्षण क्या है इस पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है ।
आपने देखा होगा कि भारतीय रेलवे और संसार के अन्य देशों में रेलवे विकलांगों के लिए अलग-अलग कोच डिब्बे का इंतजाम करती है । उस आरक्षित डिब्बे में केवल विकलांग व्यक्तियों को ही यात्रा करने दी जाती है तथा केवल कमजोर महिलाओं को ही यात्रा करने देते हैं,  हट्टे कट्टे पुरुषों को कोच में यात्रा नहीं करने दी जाती है । यदि कोई हट्टा कट्टा पुरुष उस कोच में यात्रा करता हुआ पकड़ा जाता है तो रेलवे उस व्यक्ति का जुर्माना करती है , तथा ₹500 का जुर्माना चालान काटती है, जुर्माना ना देने पर एक माह की सजा का भी प्रावधान है ।
    सरकार यह व्यवस्था इसलिए करती है, क्योंकि देश सबका है ताकतवर का भी और कमजोर का भी और विकलांगों का भी, विकलांग और कमजोर महिलाएं भी ट्रेन में यात्रा कर पाये इसलिए आरक्षित कोच की व्यवस्था करना आवश्यक है । क्योंकि ज्यादा स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ पड़ती है तो, जो फर्स्टपोस्ट पुरुष ताकतवर है, पहले की सीट पर कब्जा कर लेते हैं और कमजोर मुंह ताकते रहते हैं,यदि आरक्षित कोच या डब्बा की व्यवस्था नहीं होती तो ताकत वालों की भीड़ में विकलांग और कमजोर स्टेशन पर ही रोते रह जाते , पता स्टेशन पर ही छूट जाते ।
    जब इस देश में अंग्रेज आए तो उन्होंने न किसी को आरक्षण दिया और न ही किसी पर प्रतिबंध लगाए तो भी कमजोर वर्ग के व्यक्ति अंग्रेजी राज्य में सरकारी नौकरियों में पहले प्रवेश नहीं कर पाए ।
  अंग्रेजी सरकार में कमजोर की भागीदारी न के बराबर थी, जबकि बड़े पैमाने पर सवर्ण में लोग नौकरियों में भर्ती हो गए । तथा तहसीलदार पटवारी बाबू वकील पुलिस और सेना में भर्ती हो गये ।
“इस व्यवस्था में सबसे पहले बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने समझा उन्होंने सबसे पहले 1932 में इंग्लैंड के गोलमेज सम्मेलन में कमजोर वर्ग के लिए राजनीति और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग की ।”
     बाबा साहब सोचते थे कि ऐसा ना हो कि विकास की रेलगाड़ी पटरी पर से दौड़ती निकल जाए और भारत का कमजोर वर्ग स्टेशन पर ही बिलखता रह जाए ।
     जब बाबा साहब को संविधान लिखने का मौका मिला तो उन्होंने कांग्रेस के भारी विरोध के बावजूद भी कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था की ताकि देश के सभी नागरिक अपनी उन्नति कर सके तथा देश के विकास में अपना योगदान दे सकें ।
  मेरे हिसाब से या मेरी राय में आरक्षण कमजोर वर्ग से उनका अपना हिस्सा अधिकार ताकतवर न छीन पाए वह सा उसी कमजोर को मिले , इसका इंतजार या व्यवस्था करना है संवैधानिक आरक्षण है ।
    अब बहस इस बात की हो रही है कि आरक्षण रहना चाहिए या समाप्त हो जाना चाहिए । इस पर मेरी राय है कि सामाजिक विकलांगता जैसे सामाजिक विषमता कहते हैं उसे समाप्त करो आरक्षण अपने आप समाप्त हो जाएगा ।

    विकलांगों के आरक्षण डिब्बे समाप्त  करने के लिए देश में से विकलांगता समाप्त करनी पड़ेगी तथा राजनीति और सरकारी नौकरियों में प्राप्त आरक्षण समाप्त करने के लिए देश में सामाजिक विकलांगता जिसे सामाजिक पिछड़ापन कहते हैं उसे समाप्त करना पड़ेगा और सामाजिक पिछड़ापन समाप्त करने के लिए जातियां समाप्त करनी पड़ेगी । जिस तरह विकलांगता समाप्त करने के लिए पल्स पोलियो अभियान चलाया गया उसी तर्ज पर जातियां समाप्त करने के लिए जाती छोड़ो अभियान चलाना पड़ेगा।
     इसके शुरुआत में सरकार को ऐसा कानून बनाना पड़ेगा किस जाति और धर्म लिखने वालों द्वारों के नामांकन रद्द होने चाहिए ,वे चुनावी भी नामांकन हो या सरकारी नौकरियों का ।
आरक्षण पर लेख आपको कैसा लगा इसे कमेंट करके बताएं तथा पसंद आए तो इसे शेयर जरूर करें ।

Teg's:- Reservation ,आरक्षण, डॉ. अम्बेडकर, अंग्रेज,

इस  लेख का आप वीडियो देख सकते है 


Tuesday, 4 December 2018

बुलंदशहर हिंसा को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने प्रेस ज्ञप्ति

आज बुलंदशहर हिंसा को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने प्रेस ज्ञप्ति जारी गई है वो इस प्रकार है :-

BSP PRESS RELEASE
BSP PRESS RELEASE

1.देश की राजधानी दिल्ली के समीप पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले में भीड़ हिंसा के दौरान जबर्दस्त अराजकता, पुलिस थाना की आगजनी व अन्य तोड़फोड़ तथा उसमें पुलिस कोतवाल सहित दो लोगों की हत्या के लिये प्रदेश की बीजेपी सरकार की गलत व लापरवाह नीतियों को पूरी तरह से कसूरवार व जिम्मेवार ठहराते हुये बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद सुश्री मायावती जी ने कहा कि हर प्रकार की अराजकता को संरक्षण देने का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े व विकास के लिये तरस रहे राज्य में बीजेपी का जंगलराज कायम है जिसमें अब कानून के रखवाले भी बलि चढ़ रहे हैं जो अति दुःख व चिंता की बात है।

2.बुलन्दशहर की कल की हिंसक घटना का शिकार हुये पुलिस अधिकारी व एक निर्दोष युवक की मौत पर गहरा दुःख व संवेदना व्यक्त करते हुये सुश्री मायावती जी ने अपने बयान में कहा कि अब समय आ गया है कि बीजेपी व इनकी सरकारों को इनके ही द्वारा उत्पन्न किये गये भीड़तंत्र के हिंसक व अराजकता के राज को खत्म करने के लिये देश व प्रदेशों में कानून का राज स्थापित करने का पूरी ईमानदारी से प्रयास करना चाहिये ताकि देश के संविधान व लोकतंत्र को भीड़तंत्र की बलि चढ़ने से आगे रोका जा सके, जो कि अत्यंत ही जरूरी है।

2.इसी समय कल ही राजधानी लखनऊ में बीजेपी के एक और युवा नेता श्री प्रत्यूषमणि त्रिपाठी की हत्या का उल्लेख करते हुये सुश्री मायावती जी ने कहा कि बीजेपी की बढ़ती हुई भीड़तंत्र की उग्र व हिंसक स्थिति का शिकार अब स्वयं बीजेपी के लोग ही होने लगे हैं क्योंकि पहले दलितों, पिछड़ों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी हिंसा व उग्रता का शिकार बनाने वाले ये अराजक लोग अब अपनी आदतों से मजबूर हो गये लगते हैं और ऐसी स्थिति में बीजेपी की सरकारें सख़्त कदम उठाने का अपना कर्त्तव्य निभाने से पूरी तरह से विफल साबित हो रही है, जो सर्वसमाज के लिये अत्यंत ही चिंता का माहौल पैदा कर रही है।

3.बुलन्दशहर की अति-दुःखद घटना में मृतकों के परिवारों को केवल समुचित अनुग्रह राशि देना ही उत्तर प्रदेश बीजेपी सरकार के लिये काफी नहीं होना चाहिये बल्कि इस हिंसा के लिये सभी दोषियों को सख़्त से सख़्त सजा समय पर दिलाना भी सुनिश्चित किया जाना चाहिये ताकि देश को ऐसा महसूस हो कि उत्तर प्रदेश में कोई सरकार भी है।
BSP Press note
BSP Press note

1. During the mob violence in Bulandshahr district of western Uttar Pradesh, near Delhi's capital Delhi, the wrong and careless policies of the BJP government in the state for the killing of two people, including the fierce anarchy, the police station's arson and other vandalism, and police Kotwal in it. Taking full responsibility and responsible, BSP National President, Uttar Pradesh's former Chief Minister and former MP Ms. Mayawati said that it is the result of protecting all kinds of lawlessness that the bigger states such as Uttar Pradesh are in the state of longing and the BJP's Jangrajraj is in the state, The keepers of the people are sacrificing that which is a matter of great sorrow and worry.

2. Expressing deep sorrow and condolences on the death of a policeman and a innocent youth of the violent incident of Bulandshahr yesterday, Ms Mayawati in her statement said that the time has come that the BJP and its governments have To end the rule of violent and chaos of the mobilization generated, should be sincerely trying to establish the rule of law in the country and the states so that The constitution and democracy of the country can be prevented from being sacrificed to the crowd, which is very necessary.

2. Earlier this time, while mentioning the murder of another young leader of BJP, Shri Pratyushmani Tripathi in the capital, Lucknow, Ms. Mayawati said that the fierce and violent situation of the growing mobility of BJP has now become the cause of the people of BJP itself. Because these chaotic people, who have been victim of their violence and aggression to the first Dalits, backward, Muslim and other religious minorities, are now compelled by their habits. In such a situation, the BJP governments are proving to be totally failed due to their duty to take a drastic step, which is creating an atmosphere of concern for the common people.

3.In the highly tragic incident of Bulandshahr, only giving proper gratuity to the families of the dead should not be enough for Uttar Pradesh BJP government, but also to ensure that all the culprits are severely punished at the time of punishment. The country feels like there is a government in Uttar Pradesh.
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Poluplar teg's:- #mayawati,#बुलंदशहर,#BSP,#BJP

Thursday, 29 November 2018

You Should read - Who is this Ambedkar?

You Should read - Who is this Ambedkar?

Dr.B.R.Ambedkar
Reservation parent? Caste Guard? Religion breaks?
The Englishman, the enemy of the Brahmins?
Hindus opposition? terrorist? Or a noble leader?

Who is this Ambedkar?
It may be that many people object to these words, but above 85 percent of the people of this country are trying to establish and describe Baba Saheb in this form. Ambedkar was a teacher, a lawyer, he was a guru, he was a doctor, was a social reformer, a thinker, a thinker, an economist, a wise man, a scholar, a great person, a visionary, a common man. All like Just wit was sharp, thinking was developed and the karma was fair.
Tomorrow, when a Chaturvedi objected to the WattsAP group saying that the photograph of a Chamar should not be sent to this group, then 99 percent of the group members came to know about life and then the contest started with the contest, with all the above words. This is almost the total social media and mindset of people. What do you understand, will you argue?

When the Constitution of the country was created, almost 99.99 percent of the people did not even know what the constitution was at the end. He did not even know what the name of democracy and law is. Today their offspring are engaged in marking the question on the same Constitution and the Constitution Maker. Whose life was spent in the tunes of the British and the tricks of the kings, he is now speaking witty speech on patriotism and law. They consider curbing reservations and castes as social harmony. They consider religion and social representation to be a waste of the temple's reservation.

Well! This is their freedom of expression; otherwise, on the law and identity of our country, hardly a question is raised in a country on its own society and a large part of the country. Today the question is not reservation, constitution or Ambedkar because opposing anybody has become fashion of this country. But I crave the mentality of those people who argue that the reservation is losing the ability. These merit strikers, who stripped the ability of Eklavya and Shambuk, still attack in the dark of night to prevent any dalit from becoming an IAS. Who has said that the reservation is not in any country? They were told that the Constitution is a copy paste or that the British Government's Government of India Act is a trunk.

Such people are living in the 18th century. Because he has not read the history of the world, neither the reservation nor the constitution In the world where reservations are called affirmative action and apartheid is given advantage to ethnicity, which includes countries like developed countries like Australia, Canada, America etc. Secondly, those people do not know that Brahmin, Kshatriyya, Vaishya, Shudra are not found in foreign countries, but there is a reservation for equality based on poverty, but not social, religious, political or apartheid based discrimination and mentality.

As far as the copy of the constitution is concerned, they never read the constitution of their country, neither the history. On one hand when he believes that the reservation is not abroad, on the other side argues that the reservation in the constitution has been provided by Dr. Ambedkar who is wrong. That is, according to their condition, the Constitution is ever a copy paste, never wrong or useless. Very few people know that half of the Government of India, when it was made in 1935, were made with the idea of ​​Babasaheb, who were in the Indian system for the betterment of the Indian people.

Apart from the views of Baba Saheb Dr. Bhimrao Ambedkar, apart from reservations, establishment of Reserve Bank of India, Hirakund, Damodar river valley project, Electric grid system, Sevnojan office, Finance Commission, all the laws of women, special laws of Dalits, exploited and backward , The working hours of the workers from 14 hours to 8 and maternity leave, independent election commission, adult franchise, democracy and no Ane hundreds of things is impossible to give such a Babasaheb gave to this country, but in people's eyes gained religion and goggles race to look forward.

The entire framework of the Indian system, when it was right, is in the constitution. What can be done good and bad is dependent on governments from time to time. What is being done today is going on any side, it will go to the extreme of its boom, but from there itself, his last journey will also start. Therefore, proud of your country's heritage, national symbols and great men, along with law and order, make a resolve to keep them well so that we can fulfill the dream of the developed nation. Thank you.

Tegs:-#ambedkar,#Dr.Br.Ambedkar

Friday, 23 November 2018

राम मंदिर के मुद्दे पर BJP RSS स्वार्थ

       राम मंदिर के मुद्दे पर BJP RSS स्वार्थ

Ram mandir
राम मंदिर के मद्दे पर BJP RSS का स्वार्थ
मीडिया में इस समय राम मंदिर का मुद्दा छाया हुआ है खास करके टीवी चैनलों पर, कोई भी चैनल खोलो राम मंदिर से जुड़ी बहस सुनने को जरूर मिलती है, वह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं ,और 5 माह के बाद लोकसभा चुनाव आने वाले हैं राम मंदिर का मुद्दा इसलिए उठाया जाता है, ताकि राम के नाम पर भाजपा को जिताया जा सके , RSS और विश्व हिंदू परिषद सरकार से माहौल बनाने के लिए संसद द्वारा कानून बनाकर राम मंदिर बनाने की मांग कर रहे हैं और RSS तो 25 नवंबर में अयोध्या में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रही है ।

मेरे समझ से इस बात से कोई इनकार नहीं कर रहा है कि अयोध्या में राम मंदिर न बने, लेकिन जिन लोगों की राम में आस्था है ,उन्हें कानून के दायरे में रखकर मंदिर बनाने की बात करनी चाहिए या तो आपसी सहमति से राजीनामा करके अयोध्या में राम मंदिर बनाना चाहिए या  सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए ।

यदि विवादित जमीन पर बाबरी मस्जिद बनने से पहले यदि मंदिर मौजूद था तो अवश्य ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के पक्ष में आएगा ।
लेकिन संसद द्वारा कानून बनाकर मंदिर नहीं बनना चाहिए । क्योंकि इससे देश की पंथनिरपेक्षता की छवि धूमिल हो जाएगी । पंथनिरपेक्ष में देश में सरकार का कोई अपना धर्म नहीं होता है सरकार किसी भी धर्म के साथ पक्षपात भी द्वार नहीं कर सकती है यदि संसद कानून बनाकर मंदिर बनाती है तू इससे पहले संविधान के ढांचे में परिवर्तन करना पड़ेगा संविधान की प्रस्तावना में से पंथनिरपेक्ष शब्द को हटाना पड़ेगा ।
ब्राह्मण धर्म जिसे हिंदू धर्म कहने लगे हैं उसे राष्ट्रीय धर्म घोषित करना पड़ेगा यही बात आरएसएस और विघटन कारी ताकत नहीं करना चाहती है , RSS. देश के ताने-बाने को बिगाड़ना चाहता है ।

हजारों साल से इस देश में सभी समुदायों के लोग से रहते रहे हैं । जिस राजाओं ने धर्म के नाम पर अन्याय किया उन्हें इतिहास में सम्मान की नजरों से नहीं देखा जाता है ।
देश में एक राष्ट्रीय चिन्ह एक राष्ट्रीय गीत है राष्ट्रीय गान राष्ट्रीय पक्षी राष्ट्रीय पशु है सब कुछ है लेकिन देश का अपना एक राष्ट्रीय धर्म नहीं है क्योंकि सरकार का अपना कोई धर्म नहीं होता है सरकार सब धर्मों का सम्मान करती है ।
सम्राट अशोक को अशोक महान कहा जाता है क्योंकि बौद्ध धर्म के पास सकते लेकिन उन्होंने प्रजा को बौद्ध धर्म मानने पर मजबूर नहीं किया बी बौद्ध भिक्षु जैन मुनि और ब्राह्मणों को भी समान रूप से दान देते थे ।
देश में इस्लाम और ईसाई धर्म आने से पहले हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश था क्योंकि यहां ब्राह्मण धर्म के साथ साथ बौद्ध जैन लिंगायत धर्म के मानने वाले लोग निवास करते थे । लेकिन दलितों के साथ भेदभाव होता हैं क्योंकि देश के लोग धर्मनिरपेक्ष तो थे लेकिन जाति निरपेक्ष नहीं है ।
Read more:- जय भीम का क्या मतलब है

राम मंदिर के मुद्दे पर यह वीडियो


Friday, 2 November 2018

जय भीम का क्या मतलब है

जय भीम का क्या मतलब है

Jai Bheem Ka Mtlb
जय भीम का क्या मतलब है

ये जय भीम क्या है ,जय भीम एक ऐसा नारा है जो राजनीतिक दल सामाजिक संगठन रैलियों में विरोध प्रदर्शनों में अंबेडकरवादी लोग आदि जय भीम का नारा अवश्य लगाते हैं, या जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से मिलती हैं तो जय भीम बोल के अभिवादन करते हैं
“अक्सर जो गैर अंबेडकरवादी हैं वह पूछा करते हैं कि भाई तुम जय भीम जय भीम क्यों बोलते हो इसका क्या मतलब होता है” कुछ लोग तो जय भीम का मतलब यह सोचते हैं कि महाभारत में एक पात्र  भीम  था जिससे लोग समझते है कि यह एक काल्पनिक पात्र है जिसे लोग जय भीम बोलते हैं महाभारत में अक्सर कम ही लोग हैं जो जय भीम का मतलब सही अर्थ में जानते हैं,जय भीम का मतलब बताने से पहले मैं जय भीम शब्द की उत्पत्ति के बारे में  बताना चाहता हूं जय भीम शब्द का प्रयोग सबसे पहले बाबू हरदास ने किया था बाबू हरदास एल. एन. ने 6 फरवरी 1935 को “समता सैनिक दल“ के नाम पर एक पत्र लिखा था जय भीम का प्रचार प्रसार  अछूतो में जाकर करना है बाबू हरदास  एक पक्के अंबेडकरवादी थे।
वे बाबा साहब डॉ अंबेडकर के आंदोलन के साथ काम कर रहे थे।  एक बार जब मुस्लिम साथी कहीं जा रहे थे तब एक मुस्लिम व्यक्ति  दूसरे मुस्लिम व्यक्ति से अस्सलाम वालेकुम बोल रहे थे और जवाब में वालेकुम सलाम बोल कर निकल रहे थे तब उस समय उनके मन में विचार आया  और सोचा कि हमें भी कुछ ऐसा बोलना चाहिए जिससे हमारी पहचान हो तो उन्होंने जय भीम बोलने की शुरुआत की जय भीम बोलने लगे जवाब में बल भीम बोलने लगे । इसी कारण से जय भीम का उदय हुआ शुरुआत में जय भीम बल भीम चला लेकिन समय के साथ बल भीम  का प्रचलन कम हो गया लेकिन जय भीम बोलने का प्रचलन अभी भी जारी है 1949 के बाद डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी पुस्तक था कुछ  पत्रों में जय भीम लिखने लगे थे ।
जब जब विरोध प्रदर्शनों में जय भीम का नारा लगता है तो दुश्मनों के सीने में आग लगती है जय भीम एक ऐसा नारा है  जो फुले शाहू आंबेडकर के आंदोलन को बढ़ाने में यह नारा रीड की हड्डी का काम कर रहा है।
       जय भीम का शाब्दिक मतलब है डॉक्टर अंबेडकर की जीत जय भीम डॉक्टर अंबेडकर के लिए प्रत्येक सम्मान का प्रतीक है जय भीम बहुजन समाज की आवाज बन चुकी है कि हर सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, मुक्ति के लिए जगाने का काम कर रहा है जय का नारा लगाते ही अन्याय के प्रति ,दायित्व के प्रति, एक ताकत का एहसास होता है जय बहुजन समाज की आवाज है

इसलिए गर्व से बोलो “जय भीम”

Tuesday, 30 October 2018

जानिए दीपावली का सच

जानिए दीपावली का सच

दीपावली की सच्चाई
दीवाली की सच्चाई
दोस्तों जब हम किसी से पूछते हैं कि दीपावली क्यों मनाई जाती है तो उसका जवाब होता है कि इस दिन श्री रामचंद्र जी 14 वर्ष वनवास काटने के बाद अयोध्या वापस लौटे थे इसलिए मनाया जाता है राम चरित्र मानस के पेज नंबर 8 पर स्पष्ट लिखा है कि श्री राम वैशाख महीने में वापस अयोध्या आए जो कि अप्रैल का महीना होता है तो यह बात सिद्ध हो जाती है कि राम जी की वजह से दिवाली नहीं मनाई जाती है।

आखिर इतना बड़ा पर्व जो कि पूरे विश्व में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है आखिर किस वजह से मनाया जाता है इस पर्व को यदि बारीकी से देखा जाए तो दो ही बातें मुख्य नजर आती है।

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1-दिवाली उत्सव अमावस्या को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन तथागत बुद्ध जी ज्ञान प्राप्त कर कपिलवस्तु वापस आए थे। उनके स्वागत में कपिलवस्तु के नागरिकों ने हजारों दीपक जलाए थे।

2-जब सम्राट अशोक ने बुद्ध धम्म यात्राएं की प्रचार, प्रसार किया विश्व में धम्म को फैलाया सम्राट अशोक ने प्रण लिया कि मैं तथागत बुद्ध एवं उनके शिष्यों द्वारा दिए गए 84 हजार उपदेशो को जीवंत करूंगा, उन्होंने अपने राज्य जो कि ईरान, इराक और अफगानिस्तान तक फैला था 84 हजार स्कंध बनवाएं थे,तथा स्मृति चिन्ह बनवाए सभी जगह बुद्ध की अस्थियां रखी गई।
यह सभी स्तूपो, जलाशयों, स्कूलो, बिहारो एवं मार्गों के रूप में विकसित किए गए सर्वाधिक बिहार, राजधानी मगध में बनवाए गए। जो कि आज बिहार के रूप में जाना जाता है सम्राट अशोक ने अपने राज्य में यह घोषणा की, कि 84 हजार धम्म स्कन्धो पर कार्तिक अमावस्या को दीप जलाए जाएंगे एवं इस दिन को दीपदानउत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
➡️इसका मतलब होता है, ज्ञान का दीपक! ज्ञान को दान देना! बुद्धि का विकास करना! तथागत बुद्ध के विचारों को आम जनमानस तक फैलाना!
आज कुछ लोगों ने इस उत्सव को स्वार्थ, नीति के तहत परिवर्तित कर दिया है, और त्यौहार का रूप दे दिया है। इस दिन हम सभी देशवासियों से यह कहना चाहते हैं कि इस दिन दीप जलाएं लेकिन,ज्ञान का दीपक जलाएं।
👉अपना दीपक स्वयं बने।
👉ज्ञान को बांटे,
👉बुद्धि का विकास करें ।
इस दिन ऐसा कोई कार्य न करें जिससे पर्यावरण को नुकसान हो पटाखे न जलाए  आतिशबाजी न करें इससे प्रदूषण फैलता है और आम जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ता हैं ।
➡️बहुजन समाज को त्योहारों की सच्चाई बताना बहुत ही जरूरी है क्योंकि जितने भी त्यौहार है ब्राह्मण धर्म में उनमें रत्तीभर सच्चाई नहीं हैं ,इन त्योहारों का संबंध तथागत बुद्ध ,बुद्ध धम्म से जरूर इसका संबंध हैं ।
तथागत बुद्ध के धम्म को  ज्यादा से ज्यादा फैलाए ,तथा इस जानकारी को अधिक से अधिक लोंगों तक Share करें ।
नमों बुद्धाय             जय भीम
Source By :- Social Networking Site

Friday, 12 October 2018

सरल भाषा में समझिए धर्म तथा धम्म में अंतर

सरल भाषा में समझिए धर्म तथा धम्म में अंतर

धर्म तथा धम्म
Lord Buddha
बुध्द कहते हैं- ईश्वर कहीं भी नही हैं उसे ढूढ़ने में अपना वक़्त और ऊर्जा बर्बाद मत करों । 🍃❗


धर्म और धम्म मेँ अंतर- 🍃❗


👉 धर्म में आप ईश्वर के खिलाफ नहीँ बोल सकते, धर्म ग्रंथो की अवेहलना नहीँ कर सकते, अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीँ कर सकते। 🍃❗


जबकि धम्म मेँ तो स्वयं को जाँचने परखने और अपनी बुद्धि का प्रयोग करने की शिक्षा हैँ। 🍃❗


👉 धर्म कहता हैँ कि तेरा भला करने तथाकथित ईश्वर जैसी कोई ताकत आयेगी। 🍃❗


जबकि धम्म कहता हैँ- अत्त दीप भवः अर्थात अपन दीपक स्वयं बनो।🍃❗


👉 बुध्द भी कहते हैँ: "ना मैँ मुक्तिदाता हुँ, ना मैँ मोक्षदाता हुँ। मैँ सिर्फ मार्ग दिखाने वाला हूँ। धम्म अर्थात जीवन जीने का सर्वोतम मानवतावादी आधार । 🍃❗


👉 बहुत से लोग मानते होँगे कि धर्म और धम्म एक ही हैँ। उनको विश्लेषण करने की जरुरत हैँ। धर्म मेँ जन्म लेना पङता हैँ, जबकि धम्म में (शिक्षा) प्राप्त करनी पङती हैँ। जिसे कोई भी प्राप्त कर सकता हैँ।🍃❗


👉 बुद्ध ने अपने अनुयाइयोँ से कहा था कि धर्म में अतार्किक बातेँ हैँ। जैसे आत्मा, परमात्मा,भूत, ईश्वर, देवी-देवता आदि। जबकि धम्म वैज्ञानिक द्रष्टिकोण पर आधारित हैँ। धम्म तर्क और बुद्धि को प्राथमिकता देता है। इसलिये ईश्वर को नकारता हैँ। 🍃❗



👉 धर्म मेँ असामनता है, भेदभाव है, ऊँच-नीच है। जबकि धम्म मेँ सब एक है। सब बराबर हैँ। कोई भेदभाव नही है। धम्म एक शिक्षा है, एक ज्ञान है, जो सबके लिये है। धर्म मेँ विभाजन है। अधिकार वर्गोँ मेँ विभाजित है। जबकि धम्म मेँ वर्गहीनता है। अधिकार और ज्ञान सभी के लिये है। 🍃❗


👉 धर्म मेँ कोई ब्रम्हा को सृष्टि का रचयिता बताता है, तो कोई स्वयं को ईश्वर का दूत कहता है। जबकि धम्म की शिक्षा देने वाले ने खुद को ईश्वर का दूत ना बताकर खुद को एक सच्चा मार्ग दिखाने वाला मनुष्य बताया। 🍃❗


👉 तथागत गौतम बुध्द, ’बुध्द’ का अर्थ बताते हुए कहते हैँ: "बुध्द" एक’अवस्था अथवा स्थिति का नाम हैँ। 
एक ऐसी स्थिति जो मानवीय ज्ञान की चरम अवस्था है। 
जब मनुष्य अपने तर्क और ज्ञान से एक दुर्लभ अवस्था (बोधिसत्व) को प्राप्त कर लेता है वो ‘बुध्द’ कहलाता है



👉 धर्मोँ मेँ कानून की कठोरता है। जबकि धम्म को मानने या ना मानने मेँ आप पूर्णतया स्वतंन्त्र है। 🍃❗


👉 धम्म आप पर कोई कानून नहीँ थोपता। धर्म मेँ सब कुछ फिक्स होता है। जैसे: जो धर्म ग्रंथों मेँ लिखा है, वही सत्य है। उसका पालन किसी भी कीमत पर आवश्यक है। जबकि धम्म परिस्थितियों के आधार पर मानव हित के लिये परिवर्तन को मानता है। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता हैँ।🍃❗


👉 धम्म ‘ज्ञान’ है। इसलिये इससे तर्क-वितर्क और शिक्षा मे बढोतरी हो सकती है। जबकि धर्म मानव निर्मित ‘कानून’ है। ये जो भी नीला -पीला हैँ वही धर्म है।🍃❗


वैज्ञानिक तर्क वितर्क ही सफल जीवन का मूल आधार हैं 🍃


☸☸ नमो बुद्धाय ☸☸
Sources By  whatsapp